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एक प्रसिद्धिपरांगमुख व्यक्तित्व

                
                                                         
                            विशेष दृष्टि अपनाके
                                                                 
                            
सेवा सहयोग की मिसाल बने।
परोपकारी वृत्ति के कारण
इष्टमित्रों के सहयोग की ढाल बने।।

कांटों से भरी हैं
सेवा सहयोग और साथ की हर डगर।
जिसे साथ दिया दिल से
मझधार में कभी पीछे नहीं हटे मगर ।।

पोलिस ब्वाईज संगठन के
पावन यज्ञ की पावन समिधा बने।
पोलिस विभाग की
समस्याएं सुलझाने हर सुविधा बने।।

निज स्वार्थ को
हर समाज सेवा के लिए किए दरकिनार।
संस्था , संगठन हों या व्यक्ति को
सफलता हासिल करने, दिए हैं सहकार।।

लक्ष्य हैं मन में
निज संबंध क्षेत्र में हों सदा खुशहाली।
सोच हैं प्रशंसनीय
हर कार्य के सहयोग में दरियादिलवाली।।

आमगांव परिसर के इतिहास में
यह हैं एक प्रसिद्धि परांगमुख किरदार।
व्यक्तित्व में हैं कल्पनाशक्ति
समर्पित भाव एवं संस्कारित व्यवहार।।

श्री संतोष पुंडकर
सही सोच के कारण सबके चहेते बने।
सहयोग और सहकार के
एक अनोखे प्रशंसनीय किरदार बने।।

संतुष्ट मन से
निभाते हैं बखूबी एक अनोखा किरदार।
कि गीत उनका
कवि की कुशल लेखनी से हुआ हैं साकार।।

-ओ सी पटले
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2 महीने पहले

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