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भावनाओं की स्याही...

                
                                                         
                            मी शायर नाहाव किन्तु
                                                                 
                            
हर दिन कविता लिखूं सू।
भावनाओं की स्याही लक ,
क्रांतिकारी कविता लिखूं सू।।

समाज की दशा ना दिशा
निशदिन चौफेर देखूं सू।
विचारों की लेखनी लक ,
हर दिन कविता लिखूं सू।।

कर्णधारों की गलतियां
सुधारन की सोच कर लिखूं सू।
समाज की नवी पीढ़ी ला,
सही दिशा देन साती लिखूं सू।।

अंधारो देखकर राह मा
मशाली नित नवी जलावूं सू।
सही राह पर चलनसाती,
उजाड़ों भरपूर देखाऊ सू।।

जनजागृति साती
क्रांतिकारी कविता लिखूं सू।
क्रांति की सफलता साती,
जोशवर्धक कविता लिखूं सू।।

कभी संस्कृति का रंग
पोवारी साहित्य मा घोल देसू।
कभी लिखता- लिखता,
अतीत की कहानी सांग देसू।।

समाज की होवो भलाई
बस येतरोच सोचूं सू।
भावनाओं की स्याही लक ,
कविता रोज़ लिखूं सू।।

-ओ सी पटले
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3 महीने पहले

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