संदेशा देन,आयी से सावन।
सांग रहीं से, लिखों मनभावन।
केवल बरसात को मौसम नहीं,
येव प्रेरणा को मौसम से सावन।।
साहित्य मा लिखों मनभावन।
हर बरस सांग रहीं से सावन।
रिमझिम रिमझिम भावों की वर्षा,
साहित्य मा होना, सांग रहीं से सावन।।
धुआंधार वर्षा वानी,
नवीन विचारों की होना बारिश।
साहित्यिकों ला सांग रहीं से,
या सावन की धुआंधार बारिश।।
सावन की हरियाली वानी,
भावनाओं की होना हरियाली।
साहित्यिकों ला सांग रहीं से,
या सावन की सुंदर हरियाली।।
मेघों की गड़गड़ाहट वानी,
नीति अनीति मा होना टकराहट।
साहित्यिकों ला सांग रहीं से,
या सावन को मेघों की गड़गड़ाहट।।
बरसात मा श्रृष्टि को श्रृंगार वानी,
हर साहित्य मा होना सुंदर श्रृंगार।
साहित्यिकों ला सांग रहीं से,
येव सावन को वसुंधरा को श्रृंगार।।
जलस्तर को उतार चढ़ाव वानी,
विचारों को भी होना उतार चढ़ाव।
साहित्यिकों ला सांग रहीं से,
सावन मा मौसम को उतार चढ़ाव।।
सावन मा सेत अनेकों त्यौहार
त्यौहारों लक खुशियां देसे सावन।
संसार की खुशियां बढ़ावन,
लिखों साहित्य सांग रहीं से सावन।।
रिमझिम रिमझिम बारिश लक,
खेतों की फसलों ला बढ़ाय देसे सावन।
नित्य निरंतर साहित्य रचके,
भाषा वैभव बढ़ावन सांग रहीं से सावन।।
आता सावन मा,
साहित्य दिसन ला होना।
आता साहित्य मा,
सावन उतरन ला होना।।
-ओ सी पटले
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