लेखनी चलाओ असी कि
युवाओं मा भाषिक चेतना जाग उठे।
स्वजनों को दिलों लक,
भाषा को सौंदर्य बढ़ाओं की मांग उठें।।
लेखनी चलाओ असी कि
युवाओं मा भाषिक अस्मिता जाग उठे।
स्वजनों को दिलों लक ,
भाषा को वैभव बढ़ाओं की मांग उठें।।
लेखनी चलाओ असी कि
युवाओं मा भाषिक स्वाभिमान जाग उठे।
स्वजनों को दिलों लक,
मातृभाषा की गरिमा बढ़ाओं की मांग उठें ।।
लेखनी चलाओ असी कि
युवाओं मा सांस्कृतिक चेतना जाग उठे।
स्वजनों को दिलों लक ,
पोवारी संस्कृति को संवर्धन की मांग उठें।।
लेखनी चलाओ असी कि
युवाओं मा सामाजिक चेतना जाग उठे।
स्वजनों को दिलों लक,
पोवार पोवारी नाव को जतन की मांग उठें।।
लेखनी चलाओ असी कि
समाज मा व्याप्त साजिशों लक परदा उठें।
अना पूरों समाज मा,
ऐतिहासिक पहचान की पताका फड़कें।।
लेखनी चलाओ असी कि
पूरों समाज मा पोवारी स्वाभिमान बढ़ें।
अना संगठित इच्छाशक्ति लक,
समाज की सही ऐतिहासिक पहचान बचें।।
-ओ सी पटले
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