वो कहते है मैं ठीक हूँ!
क्या सच में मान लेना चाहिए,
या फिर क़िस्सा उस झूटी बात,का
चुपके से जान लेना चाहिए…
वो हँसते हैं बहुत ज़्यादा आजकल
तो क्या उनको छोड़ देना चाहिए,
या फिर उस हँसी में छुपा दर्द पहचान लेना चाहिए…
हद्द से ज़्यादा वो बातें करते हैं आजकल,
क्या इसको बड़बोले का नाम देना चाहिए,
या फिर उसके पीछे के अकेलेपन को
पहचान लेना चाहिए…
भावुक हो,वो रोते है आजकल अकेले में बहुत,
छोड़कर भाग जाना चाहिए या
सम्हाल लेना चाहिए…
ये ज़िन्दगी बिल्कुल खूबसूरत ना हो,अगर
किसी की किसी को ज़रूरत ना हो..
कभी सम्हल जाओ, कभी सम्हाल लो
जिंदगी काट लो या जिंदादिली से निकाल लो…
-बंसल
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