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हरसिंगार

                
                                                         
                            हरसिंगार के फूल
                                                                 
                            
मानो केसर के चावल,
रात ने चुपके से बिखेरे हों
धरती की थाली में।

ओस की बूँदें
जैसे दूध में भीगे मोती,
और भोर की पहली किरण
बन गई हो उनकी रोली।

मन हुआ, तुम्हें भी ऐसे ही
अपने प्रेम में सजा लूँ,
इश्क़ के इस केसरिया रंग को
तुम्हारे नाम कर दूँ।

न कोई मंत्र, न कोई वचन,
न दुनिया को खबर हो
इन फूलों की तरह
मैं खुद को तुम्हें अर्पण कर दूँ.....
-पूनम भास्कर
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एक घंटा पहले

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