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ना कोई शक्ल ना कोई सूरत ना नाम उसका

                
                                                         
                            ना कोई शक्ल ना कोई सूरत ना नाम उसका
                                                                 
                            
एक गुमां सा है हर वक़्त तसव्वुर में रहता है
बात कुछ भी ना थी बात इतनी बढ़ गयी 
वो अंजाना से चेहरा मेरे दिल मे रहता है
कभी होने नही देता है वो मुझको अकेला
जंहा भी जाता हूं हर महफ़िल में रहता है
समंदर ने तो बहुत कोशिश की डुबोने की
मगर मुझे बचाने वाला साहिल पे रहता है

- पी के ख्याल

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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