ना कोई शक्ल ना कोई सूरत ना नाम उसका
एक गुमां सा है हर वक़्त तसव्वुर में रहता है
बात कुछ भी ना थी बात इतनी बढ़ गयी
वो अंजाना से चेहरा मेरे दिल मे रहता है
कभी होने नही देता है वो मुझको अकेला
जंहा भी जाता हूं हर महफ़िल में रहता है
समंदर ने तो बहुत कोशिश की डुबोने की
मगर मुझे बचाने वाला साहिल पे रहता है
- पी के ख्याल
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