आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुस्कानों और आशाओं का संसार

                
                                                         
                            *ज्ञान का प्रकाश अधूरा ही रहेगा,
                                                                 
                            
यदि किसी के हृदय को छू न सको तुम।
जीवन भी अधूरा ही रहेगा,
यदि किसी के अँधेरों में
आशा का प्रकाश बनकर उतर न सको तुम।
आओ निराश चेहरों पर मुस्कान बिखेरें,
धरती और अंबर भी झूम उठें।
दिलों के फासले मिट जाएँ,
रिश्ते फिर से खिल उठें।
नफ़रत नहीं, प्रेम के फूल बिखरें,
हर मन में विश्वास बसे!
सेवा को जीवन का संकल्प बनाकर,
आओ मुस्कानों और आशाओं का नया संसार रचें।
-पवन कपूर
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर