आपके साए से जब से हो गए महरूम हम
ज़िंदगी यूँ रूठी हमसे हो गए मग़्मूम हम
अब नहीं माँ-बाप जैसे साथ का कोई सुकूँ
अब तो खुशियों के लिए औरों पे हैं महकूम हम
बाद उनके जाना हमने उनसा कोई भी नहीं
ज़िंदगी में उनके बिन अब तो हुए मादूम हम
उनकी मेहनत से ही हासिल ज़िंदगी की हर खुशी
परवरिश दी हैसियत से बढ़के हैं मम्नून हम
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