नाव को मेरी नहीं मिलता किनारा मौला
ज़िंदगी में तू ही इक मेरा सहारा मौला
थाम ले तू मेरी पतवार गुज़ारिश इतनी
हार कर दुनिया से तुझको है पुकारा मौला
इक मोहब्बत का ही तो जुर्म किया है हमने
बदले में जिसके मिला सिर्फ ख़सारा मौला
हमको मालुम न था दुश्वार यूँ होगा जीना
डूब जायेगा मुकद्दर का सितारा मौला
दर्द ही सबको मोहब्बत में मिला है 'पारुल'
क्यूँ समझता नहीं कोई ये इशारा मौला
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