खोने-पाने का भी इस दिल में नहीं अब कोई डर है
हर ख़ुशी, हर ग़म से दिल रहने लगा अब बेख़बर है
खो गया जो उसमें मर्ज़ी उस ख़ुदा की ही थी शामिल
पास है जो साथ उसके, ज़िंदगी प्यारा सफ़र है
हमने उम्मीदों का दीया ख़ुद बुझाया है ख़ुशी से
अपने मकसद पर ही रहने अब लगी मेरी नज़र है
हार से डर जाऊँगी कमज़ोर इतनी भी नहीं मैं
माना के मुश्किल बहुत अरमानों की मेरे डगर है
अब सुकूँ है दिल में सब कुछ ख़त्म हो जाने का 'पारुल'
ज़िंदगी में अब लिखी मेरे सदा फ़त्ह-ओ-ज़फ़र है
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