सफ़र के अंत में भी डोर दिल की टूटेगी न सनम
मोहब्बत के सफ़र में हम-सफ़र ये रूठेगी न सनम
रहे हैं उम्र भर हम साथ जैसे वैसे ही रहेंगे
हमारी साँस भी इक दूजे बिन तो छूटेगी न सनम
ज़माने ने बहुत चाहा अलग करना हमें तो सदा
ये क़िस्मत चाहने से भी किसी के फूटेगी न सनम
है फेवीकोल का ये जोड़ जो मज़बूत सबसे बहुत
नहीं है छेद अपनी नाव में तो डूबेगी न सनम
मोहब्बत अपनी दुनिया के लिए होगी मिसाल कभी
ये 'पारुल' तेरी, तेरे प्यार से तो ऊबेगी न सनम
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