रौशनी का रास्ता अंधेरों से हो गुज़रा है
हौसला है मन में तो ये आस्माँ भी झुकता है
रौशनी को फैलने से रोक सकता भी है कौन
वक़्त आने पर उजाला ख़ुद हमेशा उभरा है
रौशनी होने से पहले होता अं धेरा घना
ढल ही जाएँगे ये अं धेरे तू फिर क्यूँ डरता है
राहे होंगी तेरी रौशन इन उजालों से कभी
ईश्वर का नूर बन कर दिल में सूरज उतरा है
घुटने मत तुम टेक देना डर अं धेरों से कभी
हौसलों से ही तो मुस्तक़बिल सभी का बनता है
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