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मोहब्बत का नशा

                
                                                         
                            मोहब्बत का नशा बचपन की, अब तक हम पे तारी है
                                                                 
                            
सफ़र अपनी मोहब्बत का,  ख़ुदा ने रक्खा जारी है

हैं ख़ुश क़िस्मत के हासिल प्यार बचपन का हुआ हमको
वो गुज़रे वक़्त की भी याद,  लगती कितनी प्यारी है

ज़माने से भी लड़ कर थामा इक दूजे का हमने हाथi
मोहब्बत को निभा कर अब, दिखाने की ही बारी है

निभाए हमने सुख-दुख ज़िन्दगी के इस सफ़र में भी
ज़माने में मोहब्बत ये, कभी भी तो न हारी है

तुम्हारी बाहों में 'पारुल' को साँसें, आख़िरी आएँ
ख़ुदा से इल्तिजा ये ही, हमेशा इक हमारी है
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एक दिन पहले

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