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मैं नहीं काफ़ी हूँ क्या

                
                                                         
                            मैं नहीं काफ़ी हूँ क्या, ढूँढे सहारे हर-सू तू
                                                                 
                            
मैं तेरे अंदर हूँ बैठा, पर पुकारे हर-सू तू

इस जहां में रहता कण-कण में मेरा ही तो वजूद
फिर भी मंदिर और मस्जिद में निहारे हर-सू तू

हार मत हिम्मत तू, पीछे तेरे रहता मैं खड़ा
जीत हासिल करके, सपने कर सकारे हर-सू तू

हौसलों की थाम कर पतवार बढ़ता ही तू चल
अपने ख्वाबों के ही देखेगा, नज़ारे हर-सू तू

गोद में तुझको उठा बच्चे, मैं चलता हूँ सदा
अब ख़िजाँ के बाद देखेगा, बहारें हर-सू तू
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3 महीने पहले

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