मैं नहीं काफ़ी हूँ क्या, ढूँढे सहारे हर-सू तू
मैं तेरे अंदर हूँ बैठा, पर पुकारे हर-सू तू
इस जहां में रहता कण-कण में मेरा ही तो वजूद
फिर भी मंदिर और मस्जिद में निहारे हर-सू तू
हार मत हिम्मत तू, पीछे तेरे रहता मैं खड़ा
जीत हासिल करके, सपने कर सकारे हर-सू तू
हौसलों की थाम कर पतवार बढ़ता ही तू चल
अपने ख्वाबों के ही देखेगा, नज़ारे हर-सू तू
गोद में तुझको उठा बच्चे, मैं चलता हूँ सदा
अब ख़िजाँ के बाद देखेगा, बहारें हर-सू तू
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