खताएँ माफ़ करने से ये मन हल्का हो जाता है
समय के साथ ग़म सबका सदा धुँधला हो जाता है
जहां में होती है सबसे ख़ताएँ इंसाँ हैं हम सब
किया है माफ दिल से गर तो समझौता हो जाता है
गमों का बोझ दिल पर रखना रंजिश को बढ़ाता है
बनी रहती है रंजिश चाहे इक अर्सा हो जाता है
कभी सोचो के रिश्ते से बड़ी होती है क्या ग़ल्ती
तो क्यूँ बरसों का रिश्ता पल में ही स्वाहा हो जाता है
गले अपने लगाकर देखो रूठों को कभी 'पारुल'
गिलो से आइना था मैला चमकीला हो जाता है
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