आँखों में आँसू ख़ून के रहते रवाँ ता-उम्र हैं
हर इक क़दम पर मिलते हमको इम्तिहाँ ता-उम्र हैं
वो ज़िंदगी भर जान से प्यारे रहे हैं हमको तो
फिर क्यूँ कसाकश दिल में रहते दरमियाँ ता उम्र हैं
इक दिन ये सब कुछ जल के मिट्टी में ही तो मिल जाएगा
तब क्यूँ ग़लत-फ़हमी में रहते कल्ब-ओ-जाँ ता उम्र हैं
इक दिन तग़ाफ़ुल प्यार को नफ़रत में देता है बदल
शिकवे गिले दिल में सदा रहते निहाँ ता-उम्र है
सर-सब्ज़ दिल का बाग इक दिन तो उजड़ ही जाता फिर
दिल में भी तब रहते सदा आह-ओ-फुगाँ ता-उम्र हैं
दिल टूट के रहता खड़े रहने की ज़िद में ही सदा
पर इश्क के एहसास रहते अब कहाँ ता-उम्र हैं
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