तेरे ही क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है
तू भूलना न सनम हमको तुमसे प्यार भी है
है सच्चा प्यार हमारा यक़ीन तुम तो करो
तेरे ही वादे पे हमको अब ए'तिबार भी है
ख़ुदा के सजदे में झुक कर दुआ मैं करता हूँ
तू है तो इस बे-क़रारी में ही क़रार भी है
सुकून है तू ही अब मेरे ज़ेहन ओ क़ल्ब का तो
तेरा ही है नशा मुझपे, तेरा ख़ुमार भी है
बदल न जाना यूँ 'पारुल' क़सम हमारी तुम्हें
तू ही तो है जिसे इस दिल पे इख़्तियार भी है
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