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धड़कन में उदासी है

                
                                                         
                            दिल मिरा मुश्ताक़ धड़कन में उदासी है
                                                                 
                            
रूह जन्मों से मोहब्बत की ही प्यासी है

हम सुरूर-ए-दर्द में भी याद करते हैं
है असर ये दर्द का या बद-हवासी है

है मोहब्बत दिल में उनके भी मेरी ख़ातिर
सोच कर ये आँख भी रहती  रुँआसी है

ताज़गी थी प्यार में अपने कभी कितनी
लगता हर एहसास अब तो उतना बासी है

काश लौटा दे वही दिन कोई 'पारुल' को
दिल में ख़्वाहिश आज भी रहती ज़रा सी है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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