अच्छाई इक दिन सबको दिख ही जाती है किरदार की
सच्चाई है दिल में तो बाहर आती है किरदार की
अच्छी बुरी हर शख़्सियत होती है दुनिया में यहाँ
पहचान धीरे-धीरे ही हो पाती है किरदार की
सच की ही राहों पर जो चलता याद सबको रहता है
सारी ही दुनिया फिर सदा गुन गाती है किरदार की
पहचाना जाता इंसाँ कोई अपने शीरीं बोलो से
मीठी ये बोली सबके दिल को भाती है किरदार की
अच्छाई की राहों पे तुम चुपचाप 'पारुल' चल पड़ो
अच्छाई इक दिन बनती सबकी साथी है किरदार की
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