लिख रहा हूं, सोच रहा हूं, क्या लिखूं?
लिखता ही रहूं या सब छोड़ दूं?
जो लिखता हूं, वह कविता नहीं है।
जो सोचता हूं, वह विचार भर हैं।
जो लिख दूं, वह कविता नहीं, शब्द हैं।
कविता तो भाव है, अभाव का वह अभाव है।
- प्रद्युम्न त्रिवेदी
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