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हाँ मैं एक आज़ाद परिंदा बनना चाहती हूँ

                
                                                         
                            मुझे उड़ना पसंद है,
                                                                 
                            
इस दुनिया की बातों से दूर रहना पसंद है।
हाँ, मैं उड़ना चाहती हूँ
उस खुले आसमान में,

इस शोर से दूर,
अपनी ख़ामोशी में जीना चाहती हूँ।
इस भीड़ में खोना नहीं,
मैं ख़ुद को पाना चाहती हूँ

किसी की सोच की कैद में ना रहकर
मै अपनी मंज़िल ख़ुद चुनना चाहती हूँ
हवाओं से दोस्ती कर,
बादलों को छूना चाहती हूँ।

क्योंकि मैं पिंजरे मैं नहीं,
खुले आसमान मैं उड़ना चाहती हूँ।
मैं किसी की परछाई नहीं,
मैं अपनी पहचान बनना चाहती हूँ।

हाँ मैं एक आज़ाद परिंदा बनना चाहती हूँ।

~ परी नागर
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2 महीने पहले

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