हर इक सफ़र आसान है,
हाँ तू जो मेहरबान है।
जो प्यार ठुकरा कर गये,
ये मान लो नादान हैं।
समझे यहाँ जो दर्द को,
सच में वही इंसान है।
मासूम का हक़ छीन ले,
दाता नहीं हैवान है।
दुश्वारियाँ हों चाहे जो
रखवाला तो भगवान है।
- प्रदीप बहराइची
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X