आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सफ़र आसान है

                
                                                         
                            हर इक सफ़र आसान है,
                                                                 
                            
हाँ तू जो मेहरबान है।

जो प्यार ठुकरा कर गये,
ये मान लो नादान हैं।

समझे यहाँ जो दर्द को,
सच में वही इंसान है।

मासूम का हक़ छीन ले,
दाता नहीं हैवान है।

दुश्वारियाँ हों चाहे जो
रखवाला तो भगवान है।
- प्रदीप बहराइची
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर