जिंदगी क़ी राहों मे फांसी का फंदा भी है
आगे कहीं
देख लेना कही तुम्हारी ख्वाहिशों का पुलिंदा कही तुम्हारी खुदक्शी का सबब न बन जाए
तुम्हारे इश्क क़ी धूल चारो तरफ उड़ती दिखाई पड रही हैँ
मुझे लगता है इश्क तुम्हारे लिए कही तुम्हारा पेशा न बन जाये
-परसराम अरोड़ा
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