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आवाज़ नहीं खोता।

                
                                                         
                            संवाद
                                                                 
                            
सबसे पहले
आवाज़ नहीं खोता।

वह...
सुनना छोड़ देता है।

फिर
शब्द बचे रहते हैं,
अर्थ नहीं।
लोग मिलते हैं,
बात नहीं।

धीरे-धीरे...
घर बचे रहते हैं,
दरवाज़े नहीं।

विद्यालय बचे रहते हैं,
प्रश्न नहीं।
संसदें बची रहती हैं,
विश्वास नहीं।

और जब
शब्द
अपने अर्थ खो देते हैं,

तब...
सड़कें
संवाद की तलाश में
निकल पड़ती हैं।

- अपराजिता परम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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