बारिशों के मौसम हैं,
रिमझिम की फुहारें हैं।
ख्वाहिशों के जंगल हैं,
हम तो तेरे ही सहारे हैं…
बूँद बूँद करके, जिस्मों पे बिखर के,
तन को भिगाती है…
ख्वाब ख्वाब बनके,
आग आग सी दहके,
कैसे अरमान जगाती है...
जाये कहाँ, एक तेरे सिवा,
कोई नहीं है यहाँ…
हम तो तेरे ही सहारे हैं….
बारिशों के मौसम…………1
तू ही तू हर मोड़ पर,
तुझे न कोई छोड़कर,
जिसे दिल अपना कह सके…
न जाना कभी छोड़कर,
दिल मेरा कभी भी तोड़कर,
दिल मेरा ये कभी न सह सके….
बिन तेरे ज़िंदगी, कुछ नहीं, कुछ नहीं,
हम तो तेरे ही सहारे हैं….
बारिशों के मौसम…………2
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