कब मांगा था हमने हिसाब
पर तुमने मोल भाव कर ही दिया
रिश्ते को सामान बना दिया
हर पावन जज्बात की कीमत लगा दी
अब कहां से दे कीमत जज्बातों की???
इतना वजन है इनमें कि
रिश्ते को मजबूती से थामे हुए है
और दुनिया का कोई भी तराजू
इनकी नाप तोल करने में असमर्थ है
पर तुमने रिश्ते को बाजार बना
सभी जज्बातों का गला घोट दिया
आखिर रिश्ते का मोल भाव कर ही दिया
कब मांगा था हमने हिसाब
पर तुमने........................???
-सरिता सिंह
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