रिमझिम रिमझिम मेघ बरस रहे
कुछ पंछी छिपने का आसरा ढूंढ रहे
कुछ बारिश में भीग मस्ती में झूम रहे
देखो मैना पत्तियों के झुरमुट में दुबक खुद को भीगने से रोक रही
नन्हीं गौरेया पत्तियों के झुरमुट से झांक रही
छज्जे पर बैठे कबूतर न जाने बरखा से
कौन सा ताना बाना बुन रहे
कुछ बिजली के तार पर बैठे मस्ती में भीग रहे
कुछ छत की मुंडेर पर बैठे गीले पंखों
को झटक रहे
रिमझिम रिमझिम बारिश में
सभी अपनी अपनी कल्पना की उड़ानें भर रहे
-सरिता सिंह
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