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हम जमाने से नहीं जमाना हम से है

                
                                                         
                            हमारे जमाने की बात ही कुछ और थी
                                                                 
                            
तब ऐसा होता था वैसा होता था
अब तो जमाना कितना बदल गया है
तुम्हारा जमाना हमारे जमाने जैसा कहां
अक्सर ऐसे कहते सुना होगा आप सब ने
जमाना कोई भी क्यों न हो
चाहे नया हो चाहे पुराना
हर की अपनी खूबियां अपनी खामियां होती हैं
हर जमाने की खूबियों को आत्मसात करो
खामियों को त्रुटियों को सुधारने बदलने का प्रयास करो
यही तो हमारा दायित्व कर्तव्य होना चाहिए
हम जमाने से नहीं जमाना हम से है
तभी तो मिलकर एक सभ्य प्रगतिशील जमाने का आगज़ कर सकते हैं
स्वरचित -सरिता सिंह
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3 वर्ष पहले

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