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तुम जो मुझे इतना अच्छी लगती हो

                
                                                         
                            तुम जो मुझे इतना अच्छी लगती हो
                                                                 
                            
क्या तुम इस बात को जानती हो

अब मुझे कभी भुख लगती हैं,तो कभी थम सी जाती हैं
तुम्हारी याद जब आती हैं, तो मेरी आखें नम सी हो जाती हैं

अब न मेरी सुनती हो,न अपनी सुनाती हो फिर ये बतावो,मुझे तुम इतना याद क्यूँ आती हो

अब न मिलना होगा,न बिछड़ना होगा
तुम एक बार याद कर लो,तो शायद ही अच्छा होगा

तुम मुझे जो इतना अच्छी लगती हो
क्या तुम इस बात को जानती हो


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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