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"वर्तमान का संधान"

                
                                                         
                            समय प्रवाह अनंत है,
                                                                 
                            
जीवन रंग-मंच।
जो बीत गया वह स्वप्न है,
शेष सभी प्रपंच॥

भोर सुनाती रोज ही,
एक नया संदेश।
स्मृति मात्र अतीत है,
तजकर सारे क्लेश॥

कल की जो नव कल्पना,
वह केवल आभास।
जो सम्मुख, वह सत्य है,
लो वर्तमान में सांस॥

दौड़ निरर्थक बाह्य की,
छोड़ो अंध-प्रयास।
भीतर जागे करुणा,
मन में हो संतोष॥

आत्मिक शांति अमूल्य है,
घट में ले विश्राम।
वैभव के इस शोर में,
मन पाए निज धाम॥

समृद्ध जब अंतर्मन,
शांत सहज हो प्राण।
विचलित फिर करती नहीं,
बाधा और तूफ़ान॥
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एक महीने पहले

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