संपदा का सत्य
स्वर्ण-राशियों में नहीं,
मन के उस क्षण में है
जहाँ तृप्ति मुस्कुराती है।
जिसे अल्प में भी
जीवन का रस मिल जाए,
उसके लिए हर प्रभात
उत्सव बन जाता है।
अतृप्त इच्छाएँ
सागर-सी फैलती रहतीं,
पर संतोष की एक बूँद
मन को सिंचित कर देती।
जिसने सीखा
प्राप्त क्षणों को जी लेना,
उसने समय के हाथों से
सुख का अर्थ पा लिया।
वस्तुएँ नहीं,
अनुभव मनुष्य को समृद्ध करते;
रिक्त महलों से अधिक
पूर्ण हृदय मूल्यवान है।
अंततः वैभव वही,
जो भीतर उजास भर दे;
जो है, उसमें आनंद—
यही जीवन का अमृत है।
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