माँ
क्या ही लिखूँ माँ तेरे बारे मे,
जब हारा था मे ज़िंदगी से तब संभाला है मुझे
पिता के जाने के बाद टूटा था मै
खो चुका था उम्मीद पिता के जाने के बाद
मेरी माँ ने संभाला है मुझे
दी हिम्मत और संभाला है मुझे
खुद की इच्छा को मारकर
है बड़े नाज़ों से पाला है तूने मुझे
जब था मैं जिंदगी और मौत के सफर मे
उस खुदा से रो रोकर मांगा है तूने मुझे
मेरी माँ ही जानती है किन परिस्थितियों मे पाला है
मुझे मै मर जाता अगर मेरी माँ नहीं होती
क्या ही लिखूँ माँ तेरे बारे मे
त्याग और बलिदान की देवी है तू
माँ कैसे चुकाऊंगा कर्ज तेरा
जब जब हारा तब तब संभाला है तूने
हिम्मत दी और कहा सब संभाल जाएगा
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