फूट फूटकर रोया उस दिन,
जिस दिन तुमने...,
विश्वासघात का विष पिला दिया।
पता चले जब कारनामे,
मुझे पूरा का पूरा हिला दिया।
सब्र का बांध तो तब टूटा,
जब अपने ने ही यह सिला दिया।
विष दे! विश्वासघात ना करे,
जाने किसने इन दोनों को मिला दिया?
-चंद्र दत्त शर्मा
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