आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वक्त से बड़ा नहीं कोई

                
                                                         
                            वक्त से बड़ा नहीं कोई,
                                                                 
                            
वक्त की सब पर मार पड़ी है।
जब कुछ नहीं मिलता,
तो वक्त को ही कोसते हैं।
जब सब कुछ मिल जाता है,
तो उस वक्त को भूल जाते हैं।
वक्त बीतते बीतते गर्व होने लगता है,
फिर वक्त की ऐसी मार पड़ती है,
जहां थे वहीं लाकर पटक देता है।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
40 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर