सबको जाँचा परखा,
दुनिया को देखा,
पर तुम बिन...,
कोई जंचता नहीं।
चांद सितारे भी देखे,
पर तुम जैसी...,
इनकी सूरत नहीं।
रात गई, भोर हुआ,
सूर्य का तेज भी देखा,
पर तुम्हारी चमक फीकी नहीं।
मैं गुलशन भी गया,
रंग बिरंगे पुष्प देखे,
उनमें तुम जैसी सुंदरता नहीं।
तुम इन सबसे अलग हो,
तुम्हारे सामने कोई टिकता नहीं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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