परिणाम क्या हुआ?
सभी पूछते हैं।
पूछने वालों को पता नहीं है,
इस परिणाम के लिए,
कितना त्याग किया है?
तभी तो इस मुकाम तक पहुंचा है।
दिनों का चैन रातों की नींद गई,
अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है।
परिणाम तब आया,
जब अनचाहा दर्द पिया है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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