निगाहों में तो बहुत आते हैं,
पर भाता वही है...,
जो निगाहों में चढ़ जाए।
ताउम्र उसे भूल नहीं पाते,
जब तक जिंदगी खत्म ना हो जाए।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X