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मायूस जरूर हूं

                
                                                         
                            मायूस जरूर हूं,
                                                                 
                            
पर अभी टूटा नहीं हूं।
जिंदगी के कुछ खूबसूरत पल,
जिन्हें मैं जी नहीं पाया।
जुबान खामोश होकर रह गई,
मैं कुछ कह नहीं पाया।
जिम्मेदारियों ने खूब दबाया,
पर वक्त ने साथ चलना सिखाया।
रिश्तों ने जमकर रुलाया,
मैं खुलकर हँस भी ना पाया।
धन दौलत की ताकत से
मैं कभी झुक न पाया।
नजर उठाकर देखता हूं,
तो लगभग सभी को ऐसा पाया।
-चंद्र दत्त शर्मा
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3 महीने पहले

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