कभी कोई बात हो जाए,
यदि सच के साथ खड़े हों,
तो न जाने कौन दुश्मन बन जाए?
यदि गलत के साथ खड़े हों ,
तो अपना जमीर मर जाए।
सोचना समझना कैसा ?
कौन किसके साथ खड़ा है?
यह तो स्वयं ही पता चल जाए।
-चंद्र दत्त शर्मा
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