काम कभी पूरे नहीं होते,
ताउम्र काम निकलते रहते हैं।
अंत समय जब जातक बैठ जाता है,
फिर भी काम याद आते रहते हैं।
सामान दस दशक का,
पल भर की खबर नहीं,
यह हाय माया नहीं जाती,
कसक रहती जाती है,
इस काम के पीछे सबकी सहते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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