जिनको गुरूर था...,
वो हमने टूटते देखे है।
जो हमसफर साथ थे,
वो बिछुड़ते देखे हैं।
अमीरों के नजारे भी,
हमने बिखरते देखे हैं।
अपनों से अपने दूर,
गैरों के सपने देखे हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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