जिन्हें हम देखे नहीं सुहाते,
उनसे भी हम हंसकर बातें कर लेते हैं,
चाहे उनके अंदर कितना भी भरा हो जहर?
हम खुशी खुशी पी लेते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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