जब किसी का हक किसी को मिले,
तो मन मसोस कर रह जाते हैं।
हम मैं क्या कमी है? जरा सोचो तो,
काबिल होते हुए भी फिसड्डी रह जाते हैं।
जब जी तोड़ मेहनत का फल ना मिले,
तो सबके देखे स्वप्न चकना चूर हो जाते हैं।
जिन्हें बैठे बिठाए मीठा फल मिले,
वो फिसड्डी होकर भी सफल हो जाते हैं।
किस किस से जाकर कह दें अपनी व्यथा?
अच्छी सफलता पाकर भी अयोग्य हो जाते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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