आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब किसी का हक किसी को मिले

                
                                                         
                            जब किसी का हक किसी को मिले,
                                                                 
                            
तो मन मसोस कर रह जाते हैं।
हम मैं क्या कमी है? जरा सोचो तो,
काबिल होते हुए भी फिसड्डी रह जाते हैं।
जब जी तोड़ मेहनत का फल ना मिले,
तो सबके देखे स्वप्न चकना चूर हो जाते हैं।
जिन्हें बैठे बिठाए मीठा फल मिले,
वो फिसड्डी होकर भी सफल हो जाते हैं।
किस किस से जाकर कह दें अपनी व्यथा?
अच्छी सफलता पाकर भी अयोग्य हो जाते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर