इस पड़ाव तक आते आते,
बहुत कुछ याद आता है।
पहले जैसे अब नहीं वो दिन,
खो जाता है विचलित मन।
जवानी के जाते जाते,
जीवन में बहुत कुछ खो जाता है।
इस पड़ाव तक आते आते,
बहुत कुछ याद आता है।
कैसे हंसी खुशी बीते वो दिन?
अब वो बीते दिन कहां गए?
इस उम्र के जाते जाते,
दिल को चैन नहीं आता है।
इस पड़ाव तक आते आते,
बहुत कुछ याद आता है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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