हुआ क्या था?
कुछ पता नहीं,
जब भी पास आते हो,
बिना देखे गुजर जाते हो।
क्या सोचें...?
हमसे क्यों बचते हो?
हमने क्या किया है?
यह भी तो नहीं बताते हो।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X