गुमराह हो रहा है या संभल रहा है,
हमारा युवा किधर जा रहा है?
उम्र है कुछ करने की आगे बढ़ने की,
गलत बहाव में बहा जा रहा है।
सोच सबकी अलग अलग है,
मुख्य धारा से अलग थलग है,
वक्त की ठोकरें खा रहा है।
औरों की क्या नकल करना?
मुझे लगता है.....,
वक्त बुरा चल रहा है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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