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देखने को गर्दन झुका दूं।

                
                                                         
                            बसा है जो दिल में,
                                                                 
                            
उसे कैसे मिटा दूं ?
यदि निकल गया
तो हलचल मचा दूं।
पहला पहला ही होता है,
यह सबको बता दूं।
अब होती है खींचातान,
मैं खता किसकी बता दूं?
बसी है तस्वीर दिल में,
देखने को गर्दन झुका दूं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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2 सप्ताह पहले

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