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बराबरी किसी की किसी से नहीं

                
                                                         
                            बराबरी किसी की किसी से नहीं,
                                                                 
                            
फिर भी मानव बराबरी करता है।
बंदे याद कर ले उस शमशाम की,
किसी से तुलना क्यों करता है ?
ये तो सब जीते जी की तुलना है,
दिन रात पैसे के लिए एक करता है।
सबको एक जैसा होकर जाना है,
ध्यान कर! आपस में क्यों लड़ता है?
-चंद्र दत्त शर्मा
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एक घंटा पहले

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